
रिकॉर्ड :-


इस कैरीकेचर को बनाने वाले चंद्रप्रकाश शर्मा (कार्टूनिस्ट) से मेरी मुलाकात लगभग पांच साल पहले हुई। उस दौरान राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट से डिग्री कर रहे चंद्रप्रकाश अक्सर पत्रिका के परिशिष्टों के लिए कार्टून, कैरिकेचर और चित्रकथाएं बनाने के फ्रीलांस प्रयास किया करते थे। मेरे कई घपले उजाकर करने वाली खबरों पर अक्सर चंद्रप्रकाश की प्रतिक्रियाएं मुझे मिलती रहीं। कोर्स पूरा हुआ और चंद्रप्रकाश भाग्य आजमाने मुंबई चले गए। आजकल मुंबई की एक एनिमेशन कंपनी में काम कर रहे चंद्रप्रकाश ने हाल ही मेरा कैरीकेचर बनाकर मुझे मेल किया।
चंद्रप्रकाश की इस कृति को मैं हमेशा सहेज कर रखना चाहूँगा।

अपने काम को जुनून ही हद तक जीने की जिद देखनी हो, तो ईटीवी (राजस्थान) के जयपुर संवाददाता आलोक शर्मा से एक मुलाकात करें। बिना पूर्वाग्रहों के ग्लैमर के मोह से दूर कैमरे का ऐसा युवा पत्रकार जो पत्रकारिता को जीना जानता है। जिस पर अपने प्रोफेशन में बेहतर से बेहतर आउटपुट का जुनून हमेशा देखने को मिलता है। ...वह भी पूरी सादगी के साथ।
सही मायने में देखा जाए, तो आज का दिन आलोक का दिन था। जयपुर में ही सिंबॉयसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्यूनिकेशन के एक सम्मान समारोह में युवा पत्रकार आलोक शर्मा को 'यंग कम्यूनिकेटर अवॉर्ड' और 'एक्सीलेंस इन जर्नलिजम अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। राजस्थान पत्रिका से अपने करियर की शुरुआत करने वाले आलोक ने 2005 में ईटीवी ज्वॉइन किया। अपनी नौकरी लगने के साथ ही आलोक ईटीवी नेटवर्क में सबसे कम उम्र के ब्यूरो इंचार्ज (बीकानेर ब्यूरो) बने। ...और बीकानेर में बेहरीन परफोर्मेंस के चलते उन्हें जयपुर बुला लिया गया। 2008 से आलोक अब जयपुर प्रशासन से जुड़े मामलों सहित कई दूसरी बीट भी देखते हैं। आलोक को ई-टीवी नेटवर्क के तीन बैस्ट स्टोरी अवॉर्ड मिल चुके हैं।
महिला अधिकार, बाल अधिकार और संवेदनशील सामाजिक मुद्दों की खासी समझ रखने वाले आलोक जैसे पत्रकारों की मीडिया को वाकई जरूरत है। क्योंकि जिस समझ, ज्ञान, कार्यक्षमता और अंदाज के साथ युवा पत्रकारिता में आ रहे हैं, उसके बीच इस पीढ़ी के पत्रकारों में आलोक जैसे मेहनती पत्रकार प्रथम पंक्ति में आते हैं।
आप भी आलोक को बधाई दे सकते हैं। आलोक का मोबाइल नंबर - 09314889434



इस सारे मामलो की छानबीन के दौरान मुझे 104 ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए फ्रॉड का खुलासा हो रहा था। इनमें से ज्यादातर दस्तावेज विश्व की बड़ी संस्थाओं के दस्तावेजों की हुबहू नकल थे। इन संस्थाओं में संयुक्त राष्ट्र संघ, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी बैंक व बैंक की सिटी ट्रस्ट सिक्योरिटीज एण्ड फाइनेंस कं.लि., एबीएन एमरो बैंक, अफ्रीकन डेवल्पमेंट बैंक, एपेक्स बैंक, डिप्लोमेटिक कोरियर सर्विस, यूरो ट्रस्ट सिक्योरिटी, फोर्टिस बैंक, राष्ट्रीय मुद्रा विनियम कार्यालय, संयुक्त राष्ट्र संघ का एंटी टैरेरिस्ट डिपार्टमेंट, ब्रिटेन की मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस एण्ड फेयर टे्रडिंग और हांगकांग की एशिया कॉमर्शियल होल्डिंग्स इंटरनेशनल लि. जैसी संस्थाएं शामिल थी। ई-मेल के जरिए इन बड़े नामों का इस्तेमाल करने वालों ने अधिकतर मामलों में वित्तीय संस्थाओं की आड़ में पूरा खेल रचा था।
(देश की खूफिया एजेंसियों, साइबर क्राइम विशेषज्ञों और पुलिस की नाक में दम करने वाले तीन घोटालों की सच्चाई कल की कड़ी ('घोटालों का राज !') में जरूर पढ़ें।)

देश की आंतरिक सुरक्षा में तकनीक के जरिए सेंध लगाकर विदेशी शातिर धोखाधड़ी को अंजाम देने में जुटे हैं। यह धोखाधड़ी इतने बड़े पैमाने पर हो रही है कि देश के साइबर क्राइम विशेषज्ञ और तकनीकी जानकारों के होश उड़े हुए हैं। नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया, बेनिन और ब्रिटेन सहित एक दर्जन से ज्यादा देशों से प्रसारित फर्जी और लुभावने ई-मेल इस धोखाधड़ी का अहम साधन बन रहे हैं।
ई-मेल के जरिए तीन बड़े घोटालों (ब्लैक डॉलर घोटाला, लोटो लॉटरी घोटाला, 419 घोटाला) को अंजाम दिया जा रहा है। इन घोटालों में लिप्त जालसाजों व दिल्ली पुलिस के अलग-अलग अधिकारियों और ऐसे मामलों पर जांच में जुटी एजेंसियों से तथ्य जुटाए। इसी पड़ताल में मेरा संपर्क उन लोगों से बना, जो इस तंत्र को सुगठित गैंग के जरिए चला रहे हैं। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक जयपुर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे शहरों से अफ्रीकन देशों से आए जालसाज सारा खेल कर रहे हैं। इस जालसाजी से कमाए धन का उपयोग आपराधिक गतिविधियों के इस्तेमाल में हो रहा है। जिनमें फर्जी पासपोर्ट बनवाना, ड्रग कारोबार में पैसे का इस्तेमाल और हुंडी जैसे गैर कानूनी तरीकों से पैसे को जुटाना शामिल हैं।
डेढ़ अरब का प्रस्ताव
ई-मेल के जरिए धोखाधड़ी की तफ्दीश करते समय मैंने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच से जानकारी जुटाने के बाद इंटरनेट के जरिए कुछ संपर्क साधे। मुझे जो लुभावने ई-मेल आए थे, मैंने उन पर संपर्क किया। इस प्रक्रिया के दौरान बेनिन के सेंट्रल बैंक गवर्नर कार्यालय के कथित विदेश विभाग के नाम से मुझे ई-मेल के जरिए संपर्क किया गया। संपर्क डॉ. डेविड उकपडी ने किया जिन्होंने खुद को सेंट्रल बैंक का सचिव बताया।ई-मेल में डॉ. डेविड ने साफ तौर पर कहा कि, 'बेनिन सरकार के आदेश हैं कि 3 करोड़, 88 लाख अमरीकी डॉलर यानी लगभग एक अरब, 55 करोड, 20 लाख रुपए तत्काल आपके खाते में डलवा दिए जाएं। इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) के जरिए कुछ समस्या होने के कारण हम यह पैसा आपको टेलीग्राफिक ट्रांस्फर या स्विफ्ट ट्रांस्फर के जरिए ही भेज पाएंगे। इसके लिए बैंक की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और आपका पैसा एक डोमेंट खाते में अगले दावे तक के लिए रख दिया गया है। आप हमें अपना फोन नंबर और घर का पता तुरंत भिजवाएं ताकि आप अपना पैसा यूरो के्रडिट यूनियन के जरिए तुरंत ले सकें।'
6 करोड़ की सौदेबाजी, 22 करोड़ का सौदा
एक और मामले में कथित जिम्बाव्वे निवासी मार्क काबारेट ने खुद को 45 वर्षीय शिपिंग व्यापारी (न्योनी शिपिंग लाइंस से संबंधित) बताकर मुझसे लगभग 6 करोड़ रुपए की मांग की। मार्क के मुताबिक वह अर्से से ब्रिटेन में हैं और अपना शिपिंग व्यापार हाल ही ब्रिटिश सरकार के कारण छोड़ चुके हैं। मार्क ने कहा, 'आपके द्वारा भेजा गया 6 करोड़ रुपया मैं एक सिक्योरिटी फर्म के जरिए वापस भारत लाऊंगा, जहां हम मिलकर व्यापार करेंगे। इसके बदले 20 प्रतिशत एक मुश्त और तीन वर्ष बाद पूरी रकम 5 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस लौटाऊंगा।' मार्क ने प्रस्ताव के जवाब के साथ निजी फोन नंबर व पते की मांग भी की। इसके बदले मैंने मार्क को व्यापार के लिए 6 की बजाय लगभग 4 करोड़ रुपए देने की बात कही। सौदे की इस वार्ता की एवज में मार्क ने मुझे ई-मेल पर 5.5 मिलियन अमरीकी डॉलर यानी लगभग 22 करोड़ रुपए का 3 पन्नों वाला एग्रीमेंट अपने वकील ऐलन कॉली से तैयार करवाकर भिजवा दिया। इस एग्रीमेंट के मुताबिक मुझे 22 करोड़ रुपए मार्क को देना व इसे खर्च करने के अधिकार मार्क को देने की बात कही गई थी, जिस पर मुझसे महज हस्ताक्षर की मांग की गई थी। इस संबंध में मैंने नाइजीरिया पुलिस की ऐसे घोटालों पर काम कर रही विशेष टीम से संपर्क भी साधा, लेकिन दो महीने से भी ज्यादा समय निकल जाने के बावजूद नाइजीरिया पुलिस की इन घोटालों पर काम कर रही स्पेशल टीम ने कोई जवाब नहीं दिया।
फर्जी पता, फर्जी व्यापारी
खुद को ब्रिटिश व्यापारी बताने वाले मार्क और उसके वकील एलन कॉली की वास्तविकता का पता लगाने के लिए मैंने इंग्लैंड संपर्क साधा। मार्क और उसके वकील द्वारा दिए पते पर एग्रीमेंट मिलने के अगले ही दिन संपर्क भी किया गया, जिसमें पता चला कि न तो इस नाम से कोई व्यक्ति यहां है और न ही मार्क के वकील की कंपनी अस्तित्व में है। एग्रीमेंट में लिखे पते का जो प्लॉट का नंबर मार्क ने 383 बताया उस जगह इस नंबर का प्लॉट था ही नहीं।
(अगली कड़ी में आप कल जानेंगे दुनिया की कौन-कौन सी बड़ी कंपनियों, बड़े नामों के हुबहू फर्जी दस्तावेजों को जरिया बनाकर हो रही है जालसाजी - पढऩा ना भूलें 'बड़े नाम पर जालसाजी')










585 फॉलोवर्स, 203 प्रविष्टियां, 3396 टिप्पणियां और 1,44,101 क्लिक्स के साथ ब्लॉगर्स की मदद। ...और सब की सब बातें काम की। कोई मजाक थोड़े हो रहा है ब्लॉगिंग में। आशीष खंडेलवाल जी जैसे संजीदा और उम्दा ब्लॉगर्स की वजह से आज हजारों ब्लॉगर्स ब्लॉगिंग का पहला पाठ पढऩे में, तो कहीं पारंगत होने में कामयाब हो रहे हैं। ...मैं खुला समर्थन करते हुए ब्लॉगिंग के लिए बेधड़क कहता हूँ, 'आशीष जी जहां खड़े हो जाएं, लाइन वहीं से शुरू होती है।'
बीते शुक्रवार की रातभर मैं बैठा रहा। हम ब्लॉगर्स पढऩे से बचते है न..., उस रात मैंने आशीष जी के हिंदी ब्लॉग टिप्स की 54 पोस्ट बिना कंप्यूटर ऑफ किए, बिना कुर्सी से उठे पढ़ी। सिर्फ बीच में दो ग्लास पानी पीया, वह भी टेबल पर मिल गया था। कोई पागल कुत्ते ने थोड़े काटा था उस रोज मुझे, या दिमाग फिर गया था मेरा? कई सवाल आते हैं, ब्लॉगिंग में क्या बेहतर सीखें? क्या नया सीखें? मुश्किल से समय निकाल पाता हूँ, इसलिए जितना सीखने को मिल जाए मेरे लिए तो प्रसाद ही है।
मुझे याद है मैं ब्लॉगिंग में बिलकुल नया था। मेरे एक साथी ने हिंदी में ब्लॉग बनाया था। मैंने कहा था उनसे, 'भाईसाहब मुझे भी ब्लॉग बनाना है।' उन्होंने बड़े मिठास के साथ टरकाया था मुझे। बोले, 'बहुत लफड़े हैं जाखड़, टाइम नहीं है कि समझाऊं। ऐसे ही थोड़े होती है ब्लॉगिंग, बहुत दिमाग वाला काम है।' उस आदमी ने मुझे कभी कुछ नहीं बताया। कोई टिप नहीं दिया। आज तक। मैं तो बस टिप्स तलाश रहा था। आशीष जी का ब्लॉग गूगल में सर्च में मिला। सब्सक्राइब कर लिया। ज्यादा समझ नहीं आता था, इसलिए कभी मेल में आई पोस्ट पढ़ लेता तो कभी छोड़ देता था। धीरे-धीरे समझ बढ़ी। जब एहसास हुआ कि वो हर पोस्ट कीमती है, और पिछले सालभर में मैंने आशीष जी की बहुत सी पोस्ट ना पढ़कर बहुत कुछ खो दिया है, तो रातभर वक्त निकाला।
मैं लेखन से जुड़ा हूँ। इतना अनुभव हो गया है कि चार लाइन पढ़कर बता सकता हूँ कि लिखने वाला किस गहराई से लिख रहा है। घुमाने की कोशिश कर रहा है, खुद घूम रहा है या वाकई संजीदा बात कर रहा है। जब आशीष जी की 54 पोस्ट पढ़कर सोया, तो कतई महसूस नहीं हुआ कि मैंने अपना वक्त जाया कर दिया। अच्छी नींद आई। क्योंकि उनमें से चुनिंदा पोस्ट को मैंने फिर से अपने ई-मेल पर फॉरवर्ड कर लिया था, ताकि अगले दिन जैसे ही टाइम मिले, फिर उन्हें पढ़ सकूँ। इनके टिप्स उपयोग में ला सकूँ।
हम हर साल त्योहार मनाते हैं। नवरात्र आए हैं। आज सब पूजा पाठ करेंगे। इष्ट को याद करेंगे। ईद भी आ रही है। दिपावली भी आएगी, होली भी। क्यों? इतना उल्लास क्यों होता है उस दिन। क्योंकि देवताओं के प्रति पूज्य भाव हम रखते हैं। उल्लास से खुशी बिखेरते हैं। मानते हैं कि उन्होंने बिन मांगे हमें बहुत कुछ दिया है। ...तो आशीष जी का सम्मान करने में लोगों को कष्ट क्यों होता है। स्वीकार करने में घबराते क्यों हैं कि 'आशीष खंडेलवाल जी जहां खड़े हो जाएं, लाइन तो वहीं से शुरू होती है...।' एक आदमी हर रोज छह-आठ घंटे हिंदी ब्लॉगर्स के लिए निकाल रहा है। जिसके लिए खुद की पहचान से ज्यादा, हिंदी ब्लॉगिंग की पहचान मायने रखती है, उसका सम्मान पूरे जश्न से होना चाहिए। हर त्योहार, उत्सव, वार्षिकोत्सव की तरह उनका खुलकर सम्मान तो करो कभी। ताकि उन्हें लगे कि उन पर और जिम्मेदारी आ गई है, ब्लॉगर्स को और बेहतर टिप्स सिखाने की। ...ताकि हम उनसे और ज्यादा सीख पाएं। समझ पाएं। खुद को तकनीकी तौर पर विकसित कर पाएं।
आज नवरात्र है। मैं उन्हें तहेदिल से आभार और धन्यवाद देना चाहूँगा। आशीष जी कुछ लोगों को आपकी ब्लॉगिंग में सफलता से अपच हो रही है। होने दीजिए। आप बस हमें सिखाते रहें। हैप्पी ब्लॉगिंग करते रहें। शुक्रिया।
सभी ब्लॉगर्स को नवरात्र की शुभकामनाएं।











मैं जानता हंू कुछ लोग आज पूरी रात ठीक से सो भी नहीं पाए। माफी चाहंूगा अगर मेरे कुछ लिखने से नींद उड़ी आपकी। अगर नहीं उड़ी, तो उडऩी चाहिए। हर एक ब्लॉगर की उडऩी चाहिए। क्योंकि मां-बाप जागते हैं, तो बच्चे ठीक से सो पाते हैं। मां का आंचल गीला होता है, लेकिन वह बच्चे को गीला नहीं होने देती। दुलार करती है। मैं तो सिर्फ इतना ही चाहता हंू, नए ब्लॉगर्स का दुलार हो। स्वागत हो। हर्ष के साथ, पूरे सम्मान के साथ। उनकी पोस्ट पढ़ कर। हम सब करें (जितना समय निकाल पाएं, भले ही उतना)। लेकिन जरूर करें।
आज ना मैं ये लिखंूगा कि मैंने क्या लिखा। ना ये कि संगीता पुरी जी ने क्या जवाब दिया, ना ये कि ब्लॉगर्स ने अपनी टिप्पणियों में किसकी बात का समर्थन किया। आप सब सही हैं। हर व्यक्ति सही होता है। कोई कभी गलत नहीं होता। किसी की बात, किसी का विचार, किसी की सोच खारिज नहीं की जा सकती।
( संगीता पुरी जी आपका सबसे ज्यादा आभार। पूरे मामले में मेरा 0.१ प्रतिशत भी उद्देश्य आपको आहत करना (जैसा कई टिप्पणीकारों ने कहा) नहीं था। अगर ऐसा कोई दूसरे ब्लॉग का मामला होता, तो भी शायद मैं कल ही बोलता। क्यों वह समय शायद आ गया था। ...और आप तो ज्योतिष की अच्छी जानकार हैं, विद्वान हैं, जानती हैं, हर बात का समय होता है। हर घटनाक्रम का समय होता है। वह भी निश्चित। क्योंकि एक विचार जब उठता है, तो उसके लिए एक नींव होती है, जो एक दिन में, एक पल में नहीं बल्कि कई बार उठे विचारों की एक प्रकिया से तैयार होती है)। यह मामला इतना उठा मतलब ब्लॉगिंग करवट ले रही है। जैसे लोकतंत्र करवट लेता है। बदलाव आते हैं। मुद्दे उठते हैं। समर्थक भी सामने आते हैं, तो विरोध प्रदर्शन करने वाले भी। ...और इन्हीं सब से विकास संभव होता है। ऐसा भी हो सकता है, यह सोचने का मौका मिलता है।
बी.एल. पाबला जी, मनीष कुमार जी, सुमो साहब, नयनसुख जी, महक जी, गिरिजेश राव साहब, रतनसिंह शेखावत सा, सुशील कुमार जी, मयंक भाई, सुरेश शर्मा जी, डॉ. अमर कुमार, निधी जी, गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' साहब, वाणी गीत, एम. वर्मा जी, महाशक्ति, किशोर चौधरी जी, भाई हेतप्रकाश व्यास, स्वच्छ संदेश : हिंदोस्तान की आवाज, रचना सिंह जी, निशांत मिश्र जी, अजय कुमार झा, सागर नाहर जी, अनिल कांत जी और युवा पत्रकार शशांक भाई और वो सारे ब्लॉगर्स जो मुद्दे तक आए, लेकिन टिप्पणी नहीं दे पाए। नहीं देने के भी कई कारण हैं, मैं उनमें नहीं जाऊंगा (किस-किस का शुक्रिया अदा करूं), लेकिन आप सबका शुक्रिया। इसलिए क्योंकि आप आए, सब कुछ पढ़ा, पढ़कर टिप्पणियां दी। लगभग चालीस लोग आए, सिर्फ इतनी सी अपेक्षा है सब मिलकर इतना प्रयास तो करो कि इतनी टिप्पणियां पढ़ कर एक नए ब्लॉगर को दें, फिर देखिए उसका उत्साह सातवें आसमान पर नहीं जाता क्या? वह कितना बड़ा ब्लॉगर साबित होता है? वह कितना प्रोत्साहित होता है?
आप सब ने पूरी विनम्रता के साथ इस मामले को पढ़ा। पूरी विनम्रता के साथ अपना पक्ष, अपना विचार रखा। सुझाव दिए। ढेर सारे सुझाव महत्त्वपूर्ण मिले। आप सबसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। विनम्रता भी सीखने को मिली।
सबका शुक्रिया। मामले उठाते रहें, ताकि सबको कुछ ना कुछ सीखने को मिले। पढऩे वालों को भी, लिखने वालों को भी, मामला उठाने वालों को भी। हिंदी ब्लॉगर्स एक विशाल परिवार है। इस पूरे परिवार की जय हो!
जन्माष्टमी के साथ आप सबको स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं। लड्डू गोपाल की जय कन्हैया लाल की(गिरिजेश राव साहब की टिप्पणी से साभार, क्योंकि मुझे इनकी टिप्पणी सबसे ज्याद पसंद आई। शुक्रिया गिरिजेश राव साहब)।
मिलिंद सोमन से मेरी पहली मुलाकात छह साल पहले हुई थी। इस मुलाकात के साथ ही मिलिंद दोस्ती का ऐसा रिश्ता कायम कर गए, जो आज भी बरकरार है। बीते रविवार जब मिलिंद सोमन से फिर साक्षात्कार की बात मेरे एक वरिष्ठ साथी ने कही, तो छह साल पुरानी यादें ताजा हो गई। हालांकि साल में चार-छह बार मिलिंद से बातचीत होना, मिलिंद का फोन आना और अक्सर आने वाले एसएमएस जुड़ाव को बरकरार किए हुए थे, लेकिन फिर से एक बार अपने दोस्त को याद करने का बहाना मिल गया था। मैं रविवार की छुट्टी होने की वहज से घर पर था। फोन मिलाया, तो मिलिंद बोले, 'भाई शूटिंग कर रहा हंू। चेन्नई आया हुआ हूं। बताओ क्या करना है?' मैंने बातचीत की थीम बता दी। मिलिंद उस वक्त सैट पर जाने के लिए तैयार थे। बोले, 'प्रवीण, शॉट करके आता हंू। तब तक थोड़ा सोच लेता हंू।' कुछ देर बाद मिलिंद का एसएमएस आया। ...और फिर हमारी बातचीत हुई।
चेतन भगत से मेरी हाल ही मुलाकात महज एक संजोग बन गई। सप्ताहभर पर पहले जिस मशहूर साहित्यकार के उपन्यास 'थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ' को लेकर मैं अपने दोस्त से चर्चा कर रहा, उसी से मेरी अचानक मुलाकात हुई।
साथ बिस्तर पर था। फोन पर आवाज आई, 'आज शाम आप चेतन भगत के साथ हैं। चेतन आपसे बातचीत भी करेंगे और साथ ही डिनर लेंगे।' 
क्रिया कि उनकी टिप्पणी ने हमें कलेंडर दिलवा दिया।





स्टाम्प वेंडरों में हड़कंप मच गया। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के एडीएम ने कार्रवाई करते हुए एक तीन सदयीय सतर्कता दल गठित किया है, जो पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट विभाग को प्रस्तुत करेगा।

9/11 के आतंकवादी हमले की ब्लॉग पर प्रकाशित छह कडिय़ों को लेकर दुनियाभर के ब्लॉगर्स का रेस्पॉन्स मिला। अविश्वसनीय रेस्पॉन्स! उन छह दिनों में 950 से ज्यादा लोगों ने ब्लॉग पर हिट किया और कडिय़ों को पढ़ा। न केवल देशभर से मुझे फोन के जरिए जाने कितने ही ब्लॉगर्स ने संपर्क किया, बल्कि उन्हें पड़ताल का तरीका भी पसंद आया। इसी दौरान मुझे अमरीका और दुबई जैसे देशों से भी फोन आए, ई-मेल आए। मैं नहीं जानता लोगों ने मेरा मोबाइल नंबर कहां से जुटाया। शायद कुछ ब्लॉगर्स को परेशानी भी हुई, जिसके लिए मैं उनसे माफी चाहंूगा।
कुछ ब्लॉगर्स ने सरकारी घोटालों, तो कुछ ने अंतरराष्ट्रीय घोटालों के दस्तावेज गोपनीय रूप से मेल भी किए। कुछेक मित्रों ने अपने निजी मामलों में खोजबीन करने का प्रस्ताव रखा। आप सभी मेरे लिए सम्माननीय हैं, सिर्फ इतना ही निवेदन करूंगा कि जब मौका मिला, समय निकाल पाया सही काम की पड़ताल करने के लिए हमेशा तैयार हंू। आप आधी रात को भी बेझिझक गोपनीय मामलों के संबंध में संपर्क कर सकते हैं।
आप सभी ब्लॉगर्स और भविष्य में जुडऩे वाले ब्लॉगर्स को परेशानी ना हो इसलिए अभी-अभी मैंने अपने ब्लॉग पर गैजेट में मोबाइल नंबर चस्पा कर दिया है। ...खास आपके लिए। ताकि आप परेशान ना हों।
शुक्रिया।



0 मिनट पर वल्र्ड ट्रेड सेंटर का 47 मंजिला टावर-7 अचानक गिर गया। यह ट्विन टावर्स से 300 गज की दूरी पर था। इसमें सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए), डिफेंस डिपार्टमेंट, इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) और सीक्रेट सर्विस के अहम दफ्तर और मेयर रूबी जुलियानी का इमरजेंसी बंकर था। इसी टावर में वॉल स्ट्रीट में हुए घपलों की तीन-चार हजार फाइलें मौजूद थीं। अमरीकन सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक ट्विन टावर्स से गिरने वाले मलबे की वजह से टावर-7 में कई डीजल की टंकियों में आग लग गई। यानी छह सैकंड में ढेर होने वाले इस तीसरे टावर के गिरने की वजह आग थी। वैज्ञानिक आधार पर देखा जाए तो इन तीनों टावर के गिरने की गति समान थी।
मारा को 'ऑपरेशन नॉर्थवुड' पेश किया। इसके मुताबिक कॉन्टोनामो खाड़ी के अंदर व बाहर दहशतगर्दाना हमले करवाकर क्यूबा को जिम्मेदार ठहराना व क्यूबा पर फौजी चढ़ाई की जानी थी। क्यूबा के खिलाफ जासूसी रेडियो के इस्तेमाल की अफ्वाह फैलाना। क्यूबन दोस्तों के द्वारा बेस पर हमले का ड्रामा करवाना। मुख्य दरवाजे पर हंगामा शुरू करवाना। बेस पर मौजूद हवाई और पानी के जहाजों को साबूदाज करना। बेस पर बमबारी करना। बेस के बाहर पानी का नकली जहाज डुबोना। बेस में गोला बारूद फोडऩा ताकि आग लग जाए। नकली जनाजे दफन करने का ड्रामा करना। मयामी, फ्लोरिडा और वॉशिंग्टन डीसी में आतंक फैलाना और आखिर में अपने ही बिना पायलट के हवाई जहाज को क्यूबा की सरहद में मार गिराना। 'ऑपरेशन नॉर्थवुड' प्लान के मुताबिक इस जहाज के मुसाफिर एफबीआई एजेंट होंगे, लेकिन कहा जाएगा कि वह विद्यार्थी हैं। एग्लिन एयरपोर्ट बेस पर सीआईएस के एक हवाई जहाज को मुसाफिरों के जहाज का रंग लगाकर नकली सिविलियन जहाज बनाना। उस नकली जहाज को असली से बदलकर उस पर मुसाफिर सवार करना। असली जहाज को बिना पायलट का जहाज बना देना। ये दोनों जहाज फ्लोरिडा के दक्षिण में जाएंगे। नकली जहाज एग्लिन एयरफोर्स बेस पर यात्रियों को उतार कर अपने असली मिशन पर लौट जाएगा। असली जहाज बिना पायलट के क्यूबा की ओर रवाना हो जाएगा। क्यूबा के समुद्री इलाके में दाखिल होने के बाद सिग्नल मिलते ही उसे रिमोट कंट्रोल के जरिए उड़ा दिया जाएगा। इस प्लान को रॉबर्ट मैक नमारा खारिज कर देते हैं और कुछ महीनों के बाद जॉन एफ कैनेड़ी लेमिंट्जर को फौज के कमांडर के पद से हटा देते हैं। (स्रोत : टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट)

